By Dr. Umeshwar Pandey, Professor & HOD, LPS Institute of Cardiology, Kanpur | President, Cardiology Society of India – Uttar Pradesh Chapter
अक्सर मरीज़ और उनके परिवार का सबसे बड़ा सवाल होता है—
“नसों में blockage होने पर Stent लगवाएँ, Bypass करवाएँ या केवल दवा से इलाज करें?”
हाल ही में एक पाठक ने भी यही महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा।
सच यह है कि इसका उत्तर एक ही नियम से तय नहीं होता, बल्कि कई चिकित्सीय तथ्यों को साथ देखकर निर्णय लिया जाता है।
आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।
पहला महत्वपूर्ण पैमाना: Stenosis (नस की रुकावट का प्रतिशत)
जब Coronary Angiography की जाती है, तब यह देखा जाता है कि हृदय की धमनी कितने प्रतिशत संकरी (Blocked) है।
इसी को Stenosis कहा जाता है।
यह उपचार तय करने का एक महत्वपूर्ण आधार है।
यदि Stenosis 70% से कम हो
यदि रुकावट 70% से कम है और रोगी के लक्षण गंभीर नहीं हैं, तो अधिकांश मामलों में उपचार की शुरुआत इनसे की जाती है:
- उचित दवाएँ
- स्वस्थ भोजन
- नियमित व्यायाम
- तंबाकू से दूरी
- Blood Pressure, Diabetes और Cholesterol का नियंत्रण
ऐसी स्थिति में अक्सर Stent या Bypass की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि अंतिम निर्णय रोगी की पूरी चिकित्सीय स्थिति पर निर्भर करता है।
यदि Stenosis 70% या उससे अधिक हो
जब रुकावट 70% या उससे अधिक हो, विशेषकर यदि रोगी को:
- सीने में दर्द (Angina)
- सांस फूलना
- या अन्य स्पष्ट लक्षण हों
तब नस को खोलने के लिए Stent (Angioplasty) या Bypass Surgery पर विचार किया जाता है।
लेकिन केवल प्रतिशत देखकर इलाज तय नहीं किया जाता।
डॉक्टर इन बातों का भी मूल्यांकन करते हैं:
- रोगी के लक्षण (Symptoms)
- Blockage किस स्थान पर है
- कितनी धमनियाँ प्रभावित हैं
- हृदय की Pumping क्षमता (Ejection Fraction)
- Diabetes जैसी अन्य बीमारियाँ
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न: स्थिति Emergency है या Stable?
यही बात उपचार का तरीका बदल सकती है।
Emergency (चल रहा Heart Attack)
इस स्थिति में धमनी अचानक बंद हो जाती है और हृदय की मांसपेशी को नुकसान होने लगता है।
यहाँ समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।
ऐसी स्थिति में लक्ष्य होता है कि बंद धमनी को जितनी जल्दी संभव हो खोला जाए। यही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका होता है।
Stable स्थिति
यदि रोगी Stable है और Heart Attack नहीं चल रहा, तब निर्णय अधिक सोच-समझकर लिया जाता है।
बड़े Clinical Studies से पता चला है कि कई Stable रोगियों में उचित दवाएँ, जीवनशैली में सुधार और जोखिम कारकों का नियंत्रण, लंबी अवधि में जीवित रहने (Survival) के संदर्भ में, कई परिस्थितियों में तुरंत Stent कराने के समान परिणाम दे सकते हैं।
ऐसे मामलों में Stent का सबसे बड़ा लाभ अक्सर Symptoms, विशेषकर सीने के दर्द (Angina), से राहत देना होता है।
Stent कब और Bypass कब?
Stent (Angioplasty)
आमतौर पर तब विचार किया जाता है जब:
- एक या दो धमनियों में महत्वपूर्ण Blockage हो।
- Blockage तकनीकी रूप से Stent के लिए उपयुक्त हो।
Bypass Surgery
अक्सर तब बेहतर विकल्प माना जाता है जब:
- कई धमनियों में गंभीर Blockage हो।
- Blockage जटिल स्थानों पर हो।
- विशेषकर Diabetes के रोगियों में, जहाँ Surgery से बेहतर दीर्घकालिक परिणाम मिल सकते हैं।
मेरा संदेश
हर Blockage में Stent नहीं लगता।
और हर Blockage केवल दवा से भी नहीं संभलती।
70% Stenosis एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन अंतिम निर्णय आपकी पूरी चिकित्सीय स्थिति को देखकर ही लिया जाता है।
मेरा निवेदन
यदि आपकी स्थिति Stable है और Stent या Bypass पर विचार किया जा रहा है, तो अपने Cardiologist से अवश्य पूछें:
- मेरी Blockage कितने प्रतिशत है?
- क्या यह वास्तव में महत्वपूर्ण (Significant) है?
- मेरे लिए Stent, Bypass या दवा—सबसे उपयुक्त विकल्प कौन-सा है और क्यों?
जितनी अच्छी जानकारी होगी, उतना ही बेहतर और अधिक आत्मविश्वास के साथ निर्णय लिया जा सकेगा।
यदि इस विषय पर आपके मन में कोई प्रश्न हो, तो उसे नीचे टिप्पणी (Comment) में लिखिए। संभव है कि किसी आगामी पोस्ट में उसी पर विस्तार से चर्चा की जाए।
इस महत्वपूर्ण प्रश्न के लिए पाठक का हृदय से धन्यवाद।
— प्रोफ़ेसर डॉ. उमेश्वर पाण्डेय
HOD, Cardiology
LPS Institute of Cardiology, Kanpur
President
Cardiological Society of India – UP Chapter (UPCSI)
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