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I Felt Better So I Stopped Taking My Medicine

By Dr. Umeshwar Pandey, Professor & HOD, LPS Institute of Cardiology, Kanpur | President, Cardiology Society of India – Uttar Pradesh Chapter


मरीज़ों के सवाल: “सर, मुझे अच्छा लग रहा था, इसलिए दवा बंद कर दी।”

पिछले सप्ताह कई मरीज़ों ने मुझसे एक ही बात कही—

“सर, अब मुझे अच्छा लग रहा था, इसलिए मैंने दवा बंद कर दी।”

यह सुनकर लगा कि इस विषय पर विस्तार से बात करना आवश्यक है।

इस लेख को पढ़ते समय अपने आप से एक प्रश्न पूछिए—

क्या आपने भी कभी बिना डॉक्टर से पूछे दवा बंद की है?

यदि उत्तर “हाँ” है, तो यह लेख आपके लिए है।

सवाल: BP की दवा शुरू हो गई, तो क्या अब ज़िंदगी भर लेनी पड़ेगी?

बहुत से लोगों को लगता है कि Blood Pressure की दवा एक बार शुरू हो जाए, तो उसकी आदत पड़ जाती है।

यह सही नहीं है।

दवा इसलिए लंबे समय तक चलती है क्योंकि उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) एक दीर्घकालिक (Chronic) बीमारी है, न कि इसलिए कि दवा की लत लग जाती है।

दवा आपका Blood Pressure नियंत्रित रखती है। यदि आप दवा बंद कर देंगे, तो अक्सर Blood Pressure फिर से बढ़ जाएगा, क्योंकि उसे बढ़ाने वाली मूल समस्या अभी भी मौजूद है।

इसे एक सरल उदाहरण से समझिए।

चश्मा उतार देने से नज़र ठीक नहीं हो जाती, केवल साफ़ दिखाई देना बंद हो जाता है।

ठीक उसी तरह, दवा बंद करने से बीमारी समाप्त नहीं होती—सिर्फ उसका नियंत्रण समाप्त हो जाता है।

सवाल: लेकिन मुझे तो बिल्कुल अच्छा लग रहा है। फिर दवा क्यों लूँ?

यही सबसे सामान्य और सबसे महँगी गलती है।

अच्छा महसूस होना इस बात का प्रमाण है कि दवा अपना काम कर रही है।

यह दवा बंद करने का कारण नहीं है।

High Blood Pressure जैसी बीमारियाँ अक्सर बिना किसी लक्षण के भी शरीर को नुकसान पहुँचाती रहती हैं। इसलिए केवल “मुझे ठीक लग रहा है” के आधार पर दवा बंद करना सुरक्षित नहीं है।

सवाल: क्या दवा कभी कम या बंद भी हो सकती है?

हाँ, बिल्कुल।

यदि आप:

  • अपना वज़न कम करते हैं,
  • नमक का सेवन घटाते हैं,
  • नियमित व्यायाम या पैदल चलना शुरू करते हैं,
  • और स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं,

तो कई मरीज़ों में दवा की मात्रा कम की जा सकती है, और कुछ मामलों में दवा बंद भी की जा सकती है।

लेकिन यह निर्णय केवल आपके Blood Pressure की नियमित जाँच, अन्य चिकित्सीय तथ्यों और डॉक्टर के मूल्यांकन के आधार पर लिया जाता है।

यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझिए।

दवा डॉक्टर की सलाह से कम कराना समझदारी है।

दवा अपने-आप बंद कर देना जोखिम उठाना है।

सवाल: दवा महँगी पड़ रही है। क्या करूँ?

सबसे पहले अपने डॉक्टर को बताइए।

इसमें झिझकने या शर्म महसूस करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आज अधिकांश दवाओं के किफ़ायती (Affordable) विकल्प उपलब्ध हैं। यदि आपको लागत की समस्या है, तो डॉक्टर अक्सर समान प्रभाव वाली कम कीमत की दवा सुझा सकते हैं।

लेकिन यदि आप बताएँगे ही नहीं, तो समाधान कैसे निकलेगा?

दवा चुपचाप बंद कर देना कभी भी सही रास्ता नहीं है।

मेरा निवेदन

आज ही अपनी दवाओं पर एक नज़र डालिए।

अपने आप से ईमानदारी से पूछिए—

क्या पिछले एक महीने में मेरी कोई खुराक (Dose) छूटी है? यदि हाँ, तो कितनी बार?

यदि उत्तर है—“हाँ, कई बार”, तो अगली बार डॉक्टर से मिलने पर यह बात अवश्य बताइए।

यदि डॉक्टर को यह लगे कि आप नियमित रूप से दवा ले रहे हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है, तो उपचार की दिशा गलत हो सकती है।

सही इलाज तभी संभव है जब डॉक्टर के पास सही जानकारी हो।


— प्रोफ़ेसर डॉ. उमेश्वर पाण्डेय
HOD, Cardiology
LPS Institute of Cardiology, Kanpur

President
Cardiological Society of India – UP Chapter (UPCSI)

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